श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग के तत्वावधान में आयम्बिल शाला का शुभारंभ
आचार्य श्री जिनचंद्र सूरीश्वर राष्ट्रसंत मणिभद्र मुनि जश एवं श्री विराग मुनि की पावन निश्रा में हुआ उद्घाटन सभी संप्रदायों के लगभग 400 श्रद्धालुओं ने लिया आयम्बिल का लाभ
दुर्ग।
धर्म, तप, त्याग एवं संयम की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग के तत्वावधान में आज श्री ऋषभदेव परिसर, चंडी मंदिर, दुर्ग में आयम्बिल शाला का शुभारंभ किया गया। आचार्य श्री जिनचंद्र सूरीश्वर जी, राष्ट्रसंत मणिभद्र मुनि जी एवं श्री विराग मुनि जी की पावन निश्रा में उद्घाटन संपन्न हुआ। इस अवसर पर सभी संप्रदायों के लगभग 400 श्रद्धालुओं ने आयम्बिल का लाभ लिया। संतों की पावन निश्रा एवं समाजजनों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इस धार्मिक आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
आयम्बिल जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण तपस्या है, जिसमें साधक स्वाद और रुचि का त्याग करते हुए अत्यंत सादा एवं स्वादरहित भोजन ग्रहण करता है। इस तपस्या में तेल, घी, नमक, शक्कर, गुड़, चाय, दूध एवं मसालों आदि का प्रयोग नहीं किया जाता। यह आत्मसंयम, इंद्रिय निग्रह और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है।
लंबे समय से महसूस की जा रही थी आवश्यकता
*श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग के अध्यक्ष ज्ञानचंद कोठारी* ने बताया कि दुर्ग में सभी संप्रदायों के समाजजनों द्वारा लंबे समय से आयम्बिल शाला प्रारंभ करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। श्रद्धालुओं की अपेक्षा थी कि आयम्बिल तप करने वालों के लिए एक व्यवस्थित एवं समुचित सुविधा उपलब्ध हो। समाज की इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग ने आयम्बिल शाला प्रारंभ करने का सराहनीय एवं अनुमोदनीय निर्णय लिया।
*श्री ओसवाल पंचायत के मंत्री संतोष लोढ़ा* ने भी इस पहल को समाजहित में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आयम्बिल शाला का प्रारंभ सामूहिक भावना, धार्मिक आस्था और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सहयोग से यह व्यवस्था निरंतर आगे बढ़ेगी।
निर्मल बोथरा संजय लोढ़ा ने बताया कि आयम्बिल शाला प्रारंभ होने से श्रद्धालुओं को तप-आराधना के लिए एक उपयुक्त एवं व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध होगी। प्रारंभिक तौर पर आयम्बिल शाला का संचालन जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में करने का निर्णय लिया गया है। शुभारंभ के अवसर पर लगभग 400 श्रद्धालुओं द्वारा आयम्बिल का लाभ लिया जाना इस पहल की उपयोगिता तथा समाज में इसके प्रति आस्था को दर्शाता है।
*सुचारु संचालन के लिए समिति का गठन*
श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग के अध्यक्ष श्ज्ञानचंद कोठारी ने बताया कि आयम्बिल शाला का शुभारंभ समाज की लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक व्यवस्था का संचालन निरंतर एवं सुव्यवस्थित रूप से होता रहे, इसके लिए समिति का गठन किया गया है। *श्री निर्मल बाफना को आयम्बिल शाला संचालन समिति का संयोजक बनाया गया है*। समिति शाला के नियमित संचालन, आवश्यक व्यवस्थाओं एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करेगी, ताकि अधिकाधिक श्रद्धालु सुविधापूर्वक आयम्बिल तप का लाभ ले सकें।
धार्मिक आराधना के साथ सामाजिक एकता की पहल
आयम्बिल शाला का शुभारंभ धार्मिक सेवा के साथ-साथ समाज में परस्पर सहयोग, सद्भाव और एकता को मजबूत करने वाला प्रयास है। सभी संप्रदायों के लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए श्री ओसवाल पंचायत के निर्णय की अनुमोदना की तथा इसे श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी एवं समयानुकूल व्यवस्था बताया।
समाजजनों ने आशा व्यक्त की कि सामूहिक सहयोग से आयम्बिल शाला का संचालन दीर्घकाल तक सुचारु रूप से होता रहेगा और अधिकाधिक श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठाकर तप, त्याग एवं संयम की जैन परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।
श्री ओसवाल पंचायत, दुर्ग द्वारा प्रारंभ की गई यह आयम्बिल शाला समाज की धार्मिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता, संतों की प्रेरणा और सामूहिक प्रयास का सराहनीय उदाहरण है।
