भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में 200 विद्यार्थियों ने लिया भाग
कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक किया सहभाग
दुर्ग। केंद्रीय विद्यालय संगठन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनके नैतिक एवं संस्कारपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय दुर्ग में विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, संस्कार, नैतिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा में कक्षा छठवीं से लेकर बारहवीं तक के लगभग 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
परीक्षा के आयोजन में विद्यालय की शिक्षिका कविता पटले, क्षमा जायसवाल, डॉ. अजय आर्य, संजू कुमारी सहित अन्य शिक्षकों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। गायत्री परिवार से जुड़े धीरज टांक ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला।
संस्कृति से जुड़ना जरूरी
कविता पटले ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पुस्तकीय ज्ञान के साथ विद्यार्थियों को अपने देश की संस्कृति, परंपराओं, संस्कारों और नैतिक मूल्यों की जानकारी होना भी आवश्यक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव और जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
डॉ. अजय आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं और रीति-रिवाजों का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली विचारधारा है। विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति के मूल्यों को जानने के साथ-साथ उन्हें अपने आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी परीक्षाएं विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की दिशा में प्रेरित करती हैं।
ज्ञान के साथ संस्कार भी जरूरी।
विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती पुष्पा बड़ा ने परीक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उनमें संस्कार, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को जानने और उसके सकारात्मक मूल्यों को जीवन में अपनाने का अवसर प्रदान करती है।
गायत्री परिवार के धीरज टांक ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की विशेषताओं और उसके जीवनोपयोगी मूल्यों से परिचित कराया तथा परीक्षा के लिए उनका मार्गदर्शन किया। परीक्षा के आयोजन में रोहित देशमुख हिंसाराम साहू क योगी के महत्वपूर्ण भूमिका रही।
परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। आयोजन का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का आकलन करना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, संस्कार और मानवीय मूल्यों से जोड़ना भी रहा।
