अनिल श्रीवास्तव की पुस्तक ‘प्रीति एक दिव्य जीवन ज्योति’ का विमोचन
यह पुस्तक परस्पर विश्वास, प्रेम और समर्पण के सिद्धांतों को समझने का लेखा-जोखा है- बलदाऊ राम
दुर्ग, 9 अक्टूबर 2026। सियान जन कल्याण समिति पोटियाकला के बैनर तले अनिल श्रीवास्तव द्वारा रचित पुस्तक ‘प्रीति एक दिव्य जीवन ज्योति : निकुंज से नित्यधाम तक (एक स्मृति यात्रा)’ का विमोचन किया गया। यह पुस्तक उसने अपनी स्मृतिशेष जीवनसंगिनी 'प्रतिभा श्रीवास्तव' के जीवन में प्रेम, त्याग, पारिवारिक संस्कारों एवं कृष्ण-भक्ति को समर्पित की है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त सेलटैक्स अधिकारी श्री बंशी राम मंडावी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिंदी साहित्य भारती, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री बलदाऊ राम साहू ने की। विशेष अतिथि एवं समीक्षक के रूप में डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा, विभागाध्यक्ष, छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दुर्ग; डॉ. मोहन सिंह पूर्व प्राध्यापक, कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा तथा डॉ. अनिल वर्मा, चार्टर्ड इंजीनियर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। पुस्तक के लेखक श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि वे न तो लेखक हैं और न ही कवि; मैंने इस पुस्तक की रचना अपनी पत्नी की यादों को जीवंत रखने के लिखा है। इस पुस्तक में पारिवारिक जनों, इष्ट मित्रों एवं प्रतिभा के सत्संगी सखियों के द्वारा प्रेषित श्रद्धांजलि आलेख, कविता आदि शामिल है। जो कि स्व. प्रतिभा श्रीवास्तव के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालता है।
मुख्य अतिथि के आसंदी से बंशी राम मंडावी ने कहा कि श्रीवास्तव द्वारा रचित यह पुस्तक ऐसी भावपूर्ण कृति है, जो पाठक के हृदय तक पहुँचती है। इसमें प्रतिभा जी के स्नेह, संस्कार, सेवा, पारिवारिक समर्पण और आध्यात्मिक आस्था का सुंदर चित्रण है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार बलदाऊ राम साहू ने कहा कि यह कृति ‘स्मृतियों का जीवंत दस्तावेज’ ही नहीं, बल्कि आदर्श दाम्पत्य जीवन, पारिवारिक सामंजस्य, परस्पर विश्वास, प्रेम और समर्पण के सिद्धांतों को समझने का लेखा-जोखा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारतीय सनातन परंपरा के विवाह संस्कारों तथा सप्तपदी व सप्तवचनों की सार्थकता को परिभाषित करता है।
समीक्षक डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा ने कहा कि श्रीवास्तव जी का लेखन अत्यंत भावपूर्ण है। यह पुस्तक वर्तमान समय में सफल दाम्पत्य जीवन के सिद्धांतों की अद्भुत विवरणिका भी है। उन्होंने लेखक को इस सार्थक साहित्यिक प्रयास के लिए अभिनंदन दिया।
डॉ. मोहन सिंह चिंतक ने अपने वक्तव्य में कहा कि पुस्तक में प्रतिभा जी की शिक्षा-दीक्षा, विवाह, परिवार के प्रति समर्पण, बच्चों के मार्गदर्शन, शिक्षकीय जीवन और आध्यात्मिक यात्रा का अत्यंत मर्मस्पर्शी वर्णन है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा जी एक आदर्श पत्नी, माँ, शिक्षिका, कृष्ण भक्त और सत्संगी के रूप में उभरकर सामने आती हैं।
विशेष अतिथि डॉ. अनिल वर्मा ने प्रतिभा जी को बहुमुखी प्रतिभा की धनी, सुशील, कुशल गृहिणी एवं रसायन शास्त्र की व्याख्याता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रेम, संस्कार और मार्गदर्शन से परिवार को एक सूत्र में बाँधकर रखा।
कार्यक्रम में समिति के सदस्यों के अतिरिक्त हिंदी साहित्य समिता दुर्ग के सचिव राकेश गुप्ता, वरिष्ठ नागरिक संघ पद्मनाभपुर सदस्य श्री एस एन पाटिल, श्रीआर .के.सिंह ,श्री ए .आनंद डोनगांवकर इष्ट मित्रों एवं शुभचिंतकों की सहभागिता से कार्यक्रम आत्मीय और भावुक बन गया।